गरीब आदमी और हंस की कहानी

गरीब आदमी और सोने के अंडे देने वाली हंस | लालच की कहानी

गरीब आदमी और सोने के अंडे देने वाली हंस | लालच की कहानी


गरीब आदमी और सोने के अंडे देने वाली हंस
(धैर्य, लालच और जीवन का कड़वा सत्य)

बहुत समय पहले की बात है। पहाड़ों और जंगलों से घिरे एक छोटे से गाँव में धनु नाम का एक गरीब किसान रहता था। उसका घर मिट्टी का था, छत पर सूखी घास बिछी रहती थी, और बरसात के दिनों में छत से पानी टपकता था।धनु के पास न तो ज्यादा ज़मीन थी, न ही कोई बड़ा साधनउसके जीवन की पूँजी सिर्फ़ ईमानदारी, मेहनत और धैर्य थी।
धनु हर सुबह सूरज निकलने से पहले उठतापत्नी सीता और छोटा सा बेटा मोहन अभी सो रहे होते।वह अपने फटे पुराने कपड़े पहनकर खेतों की ओर निकल जाता।
दिन भर खेत में काम करता—कभी हल चलाता,कभी घास काटता,कभी दूसरों के खेतों में मजदूरी करता
शाम को जब वह घर लौटता, तो हाथ में बस थोड़ा सा अनाज और चेहरे पर थकान होती।सीता मुस्कुरा कर कहती,“कोई बात नहीं, आज भी पेट भर खाना मिल गया, यही बहुत है।”
धनु सिर हिला देता, लेकिन उसके मन में एक टीस सी उठती—“क्या मेरी पूरी ज़िंदगी बस ऐसे ही बीत जाएगी?”


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जंगल में मिली अनोखी हंस
एक दिन गाँव के मुखिया ने ऐलान किया कि जंगल के पास की ज़मीन साफ़ करनी है।धनु भी काम की तलाश में जंगल की ओर गया।
दोपहर के समय जब वह थक कर एक पेड़ के नीचे बैठा, तभी उसकी नज़र झाड़ियों के बीच कुछ चमकते हुए पर पड़ी।पहले उसे लगा कि शायद धूप का भ्रम है।
लेकिन जब वह पास गया, तो उसकी आँखें खुली की खुली रह गईं
वहाँ एक सफेद, सुंदर हंस बैठी थी।उसके पंख रेशम जैसे चमकदार थे, और आँखों में अजीब सी शांति थी।
हंस उसे देखकर डरी नहीं।उल्टा, शांति से उसकी ओर देखने लगी
धनु ने धीरे से कहा,“डरो मत… मैं तुम्हें नुकसान नहीं पहुँचाऊँगा।”
हंस कुछ पल तक उसे देखती रही, फिर धीरे से आगे बढ़ी और…वहाँ ज़मीन पर एक अंडा गिरा दिया।
धनु ने अंडा उठाया और अचानक उसका दिल ज़ोर से धड़कने लगा।वह अंडा सोने का बना हुआ था!
हे भगवान!”उसके मुँह से बस यही निकला
उसने अंडे को धूप में देखा—वह असली सोना था, भारी और चमकदार

जीवन का पहला चमत्कार
धनु अंडा लेकर सीधा घर पहुँचासीता पहले तो डर गई,“यह कहाँ से लाए हो?”
जब उसने पूरी बात बताई, तो सीता की आँखों में डर और आश्चर्य दोनों थे।
अगले दिन धनु ने अंडा शहर में सुनार को दिखायासुनार ने जाँच की और बोला,“यह शुद्ध सोना है।”
उस दिन धनु को इतने पैसे मिले जितने उसने ज़िंदगी में कभी नहीं देखे थे।
उस रात घर में दीया ज्यादा देर तक जलता रहा।सीता ने कहा,“अगर यह हंस रोज़ एक अंडा दे, तो हमारी ज़िंदगी बदल जाएगी।”
धनु ने अगले दिन फिर जंगल जाकर हंस को घर ले आया।उसने हंस के लिए एक साफ़ जगह बनाई, उसे दाना-पानी दिया।
हंस शांत थी।हर सुबह वह एक सोने का अंडा देती

खुशहाली का आगमन
दिन बीतते गए।धनु का जीवन बदलने लगा।
मिट्टी का घर पक्का हो गया
बेटे को पढ़ने के लिए भेजा गया
गाँव में इज़्ज़त बढ़ने लगी
पहले जो लोग धनु को नजरअंदाज़ करते थे,अब वही लोग कहते,“धनु बहुत समझदार आदमी है।”
लेकिन जैसे-जैसे धन बढ़ा, वैसे-वैसे मन में लालच की हल्की सी आग जलने लगी
धनु सोचने लगा,“अगर रोज़ एक अंडा मिलता है, तो एक साल में कितनी दौलत होगी?”“अगर दो अंडे मिलते तो?”“अगर… सारे अंडे एक साथ मिल जाएँ तो?”
सीता ने उसे समझाया,“जो मिल रहा है, उसी में खुश रहो। लालच ठीक नहीं।”
लेकिन अब धनु का मन पहले जैसा शांत नहीं रहा।

लालच की शुरुआत
एक रात धनु सो नहीं पाया।वह बार-बार हंस की ओर देख रहा था।
उसके मन में विचार आया—“इस हंस के पेट में तो ढेर सारे सोने के अंडे होंगे।”
वह खुद से बोला,“अगर मैं एक बार में सब अंडे निकाल लूँ, तो मुझे काम करने की ज़रूरत ही नहीं रहेगी।”
अगली सुबह हंस ने हमेशा की तरह एक अंडा दिया।लेकिन आज धनु को उसमें खुशी नहीं हुई।
उसने हंस को उठाया।हंस ने पहली बार घबराकर आवाज़ निकाली
सीता चिल्लाई,“धनु! क्या कर रहे हो? इसे छोड़ दो!”
लेकिन लालच ने उसकी सुनने की शक्ति छीन ली थी।

विनाश का क्षण
धनु ने काँपते हाथों से…हंस का पेट चीर दिया।
लेकिन वहाँ कुछ भी नहीं था।
सोना,न अंडे,बस खून और एक निःशब्द शरीर
हंस वहीं मर गई।
कुछ पल तक धनु वहीं बैठा रहा।उसके हाथ काँप रहे थे।आँखों में अविश्वास था।
सीता रो पड़ी।बेटा डर से माँ से लिपट गया।
उस दिन से घर में फिर से सन्नाटा छा गया।

सब कुछ खो देना
अब न रोज़ अंडा था,न नई दौलत।
जो पैसा था, वह धीरे-धीरे खर्च हो गया।बीमारी आई,काम बंद हुआ,लोगों ने मुँह मोड़ लिया।
वही गाँव, वही लोग—अब कहते थे,“लालच ने सब कुछ बर्बाद कर दिया।”
धनु फिर से मजदूरी करने लगा,लेकिन अब उसके मन में हमेशा एक बोझ था।
वह अक्सर रात को सोचता—“अगर मैंने धैर्य रखा होता…”

अंतिम सीख
एक दिन धनु ने अपने बेटे से कहा,“बेटा, जीवन में जो मिलता है, उसकी क़द्र करो।लालच इंसान से उसका सब कुछ छीन लेता है।”
बेटे ने सिर हिलाया
धनु ने आकाश की ओर देखा—उसे लगा जैसे कहीं दूर वह सफेद हंस उड़ रही हो…लेकिन अब वह बस एक याद थी।

कहानी की सीख (Moral)
👉 लालच का अंत हमेशा विनाश होता है।👉 धैर्य और संतोष ही सच्ची दौलत हैं।👉 जो रोज़ मिलता है, वही सबसे बड़ा उपहार होता है।

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