जादुई सरहद की सौगंध
(एक रोमांचक, देशभक्ति और जादू से भरी मौलिक हिंदी परी-कथा)बहुत समय पहले की बात है।पहाड़ों के उस पार एक ऐसा इलाका था, जहाँ सरहद सिर्फ ज़मीन को नहीं, दिलों को भी बाँटती थी।
उसी सीमा के पास बसे छोटे से गाँव में वीर नाम का एक नौजवान रहता था।उसकी आँखों में आग थी और दिल में देश के लिए अटूट प्रेम।
वीर साधारण किसान का बेटा था।लेकिन उसके भीतर असाधारण साहस छिपा था।
गाँव के बुजुर्ग अक्सर कहते थे,“यह लड़का एक दिन इतिहास लिखेगा।”
सरहद के उस पार अंधेरे का एक रहस्यमयी किला था।लोग कहते थे वहाँ एक मायावी शक्तिशाली तांत्रिक रहता है,जो लोगों के मन में डर भर देता है।
उस तांत्रिक का नाम था ज़ारिक।वह काले जादू से लोगों की हिम्मत तोड़ देता था।
एक रात गाँव पर अजीब हमला हुआ।आसमान लाल हो गया।हवा में भय की गंध फैल गई।
लोगों के सपनों में ज़ारिक दिखाई देने लगा।वह कहता—“सरहद अब मेरी है।”
वीर ने यह सब सहन नहीं किया।उसने कसम खाई—“जब तक मैं हूँ, डर इस मिट्टी को छू नहीं सकता।”
गाँव के मंदिर में एक प्राचीन तलवार रखी थी।कहा जाता था, उसमें जादुई शक्ति है।
लेकिन वह तलवार सिर्फ उसी के हाथ में जागती थी,जिसका दिल सच्चा हो।
वीर मंदिर पहुँचा।उसने आँखें बंद कर प्रार्थना की।
अचानक तलवार चमक उठी।उसके हाथ में आते ही उसमें से नीली रोशनी फूट पड़ी।
गाँव वालों की उम्मीद जाग उठी।वीर अब सिर्फ किसान का बेटा नहीं था।वह सरहद का रक्षक बन चुका था।
वीर सरहद पार करने निकला।हवा तेज थी,लेकिन उसका इरादा उससे भी मजबूत।
जैसे ही वह सीमा के पास पहुँचा,धरती काँपने लगी।
ज़ारिक प्रकट हुआ।उसकी आँखों में बिजली चमक रही थी।
“एक अकेला लड़का मुझे चुनौती देगा?”वह हँसा।
वीर ने तलवार उठाई।“मैं अकेला नहीं हूँ।मेरे साथ मेरा देश है।”
ज़ारिक ने भ्रम रचा।वीर के सामने उसके परिवार की तस्वीरें दिखाईं।
“लौट जा, नहीं तो सब खत्म हो जाएगा,”ज़ारिक गरजा।
वीर की आँखें नम हुईं।लेकिन उसका दिल नहीं डगमगाया।
“डर से बड़ा मेरा फर्ज है,”उसने दृढ़ स्वर में कहा।
युद्ध शुरू हुआ।तलवार की चमक और काले जादू की लपटें टकराईं।
हर वार के साथ धरती गूँज उठी।
ज़ारिक ने आखिरी दांव खेला।उसने सरहद के पत्थरों को जंजीरों में बदल दिया।
गाँव के लोग कैद हो गए।
वीर ने गहरी सांस ली।उसे अपनी माँ की बात याद आई—“सच्चा बल भीतर से आता है।”
उसने तलवार को दोनों हाथों से पकड़ा।दिल से एक हुंकार निकली।
तलवार में सुनहरी रोशनी फैल गई।
उसने ज़ंजीरों पर वार किया।जंजीरें टूटने लगीं।
ज़ारिक चीखा।उसकी शक्ति कमजोर होने लगी।
“यह असंभव है!”वह चिल्लाया।
वीर ने अंतिम वार किया।नीली और सुनहरी रोशनी मिलकर आसमान में छा गई।
ज़ारिक धुएँ में बदल गया।
सरहद फिर शांत हो गई।
गाँव वाले आज़ाद हो गए।
वीर वापस लौटा।उसका चेहरा थका हुआ था,लेकिन आँखों में जीत की चमक थी।
गाँव में उत्सव मनाया गया।लोगों ने उसे गले लगाया।
लेकिन वीर ने कहा—“यह जीत मेरी नहीं,हम सबकी है।”
उस दिन के बाद सरहद पर कभी अंधेरा नहीं छाया।
लोग कहते हैं,जब भी कोई डर सर उठाता है,वीर की तलवार की चमक फिर दिखाई देती है।
और यह कहानी हमें याद दिलाती है—
✨ सीख:जब दिल में देश और सच का साथ हो,तो कोई जादू, कोई अंधेरा टिक नहीं सकता।
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