बृहस्पतिवार की कथा
बृहस्पतिवार की कथा: गरीब बहू और बृहस्पति देव की कृपा
बहुत समय पहले की बात है। एक छोटे से गाँव में एक गरीब ब्राह्मण परिवार रहता था। उस परिवार में माता-पिता, दो बेटे और एक बहू थी। बड़े बेटे की पत्नी अत्यंत सुशील, शांत स्वभाव और धर्म में आस्था रखने वाली थी, जबकि छोटे बेटे की पत्नी घमंडी, आलसी और बात-बात पर क्रोध करने वाली थी।
परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। घर में न खेत थे, न पशु, न धन। जो थोड़ा-बहुत मिलता, उसी में गुज़ारा होता। फिर भी बड़ी बहू हमेशा प्रसन्न रहती, ईश्वर का स्मरण करती और बड़ों का आदर करती।
🌿 बृहस्पतिवार का व्रत और बड़ी बहू
गाँव में एक पुरानी परंपरा चली आ रही थी कि बृहस्पतिवार को भगवान बृहस्पति का व्रत रखने से घर में सुख-समृद्धि आती है। बड़ी बहू ने यह बात अपनी सास से सुनी थी।
एक दिन उसने मन ही मन निश्चय किया—“भले ही हमारे घर में गरीबी है, पर मैं सच्चे मन से बृहस्पतिवार का व्रत करूँगी।”
पहले ही बृहस्पतिवार उसने पीले वस्त्र पहने, घर को साफ किया, तुलसी में जल चढ़ाया और भगवान बृहस्पति का स्मरण किया। घर में पीली दाल या चावल तक नहीं थे, फिर भी उसने सादे मन से पूजा की।
🌧️ छोटी बहू का तिरस्कार
छोटी बहू ने यह सब देखा और हँसते हुए बोली—“अरे भाभी! इन व्रत-कथाओं से कोई अमीर बनता है क्या? अगर देवता इतने ही दयालु होते तो हम गरीब क्यों होते?”
बड़ी बहू मुस्कुरा कर बोली—“ईश्वर पर विश्वास रखने से मन को शांति मिलती है। फल मिलेगा या नहीं, यह उनकी इच्छा है।”
छोटी बहू ने उसका मज़ाक उड़ाया और बृहस्पतिवार को मांस-मदिरा बनाकर खाने लगी।
🌟 बृहस्पति देव का आगमन
एक बृहस्पतिवार की रात, बड़ी बहू ने सपना देखा। उसने देखा कि एक तेजस्वी वृद्ध पीले वस्त्रों में उसके सामने खड़े हैं। उनका मुख तेज से दमक रहा था।
वृद्ध ने कहा—“बेटी, मैं तुम्हारी श्रद्धा से प्रसन्न हूँ। जो माँगना हो, माँगो।”
बड़ी बहू हाथ जोड़कर बोली—“हे प्रभु, मुझे धन नहीं चाहिए। बस मेरे परिवार में सुख-शांति बनी रहे।”
वृद्ध मुस्कुराए—“तुम्हारा धैर्य ही तुम्हारा सबसे बड़ा धन बनेगा।”
इतना कहकर वे अंतर्ध्यान हो गए।
🌾 जीवन में परिवर्तन की शुरुआत
कुछ ही दिनों बाद एक चमत्कार हुआ। गाँव के ज़मींदार ने बड़े बेटे को अपने खेतों की देखभाल का काम सौंप दिया। मेहनत के बदले अनाज मिलने लगा।
धीरे-धीरे घर की हालत सुधरने लगी। बड़ी बहू हर बृहस्पतिवार व्रत रखती रही। वह न तो घमंड में आई, न ईश्वर को भूल पाई।
🔥 छोटी बहू का अहंकार और पतन
छोटी बहू यह सब देखकर जलने लगी। उसने भी दिखावे के लिए बृहस्पतिवार का व्रत रखना शुरू किया, लेकिन मन में लालच और ईर्ष्या भरी रही।
एक दिन उसने झूठ बोलकर पूजा में चोरी का पीला वस्त्र चढ़ा दिया। उसी रात उसने सपना देखा कि वही वृद्ध क्रोधित रूप में आए।
वृद्ध बोले—“व्रत मन से होता है, दिखावे से नहीं। तुम्हारे अहंकार का फल तुम्हें अवश्य मिलेगा।”
कुछ ही दिनों बाद छोटे बेटे का काम छूट गया, घर में कलह बढ़ने लगी और छोटी बहू बीमार पड़ गई।
🌼 पश्चाताप और सच्ची भक्ति
बीमारी में पड़ी छोटी बहू को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने बड़ी बहू से क्षमा माँगी—“भाभी, मैंने तुम्हारा अपमान किया। मुझे सही रास्ता दिखाओ।”
बड़ी बहू ने प्रेम से कहा—“ईश्वर सबको क्षमा करते हैं, बस मन सच्चा होना चाहिए।”
छोटी बहू ने सच्चे मन से बृहस्पतिवार का व्रत शुरू किया, मांस-मदिरा त्याग दी और सेवा-भाव अपनाया।
🌸 बृहस्पति देव की कृपा
एक दिन दोनों बहुओं ने एक साथ व्रत किया। उस रात दोनों को सपना आया। बृहस्पति देव ने कहा—“जहाँ श्रद्धा, धैर्य और प्रेम होता है, वहीं मेरा वास होता है।”
कुछ समय बाद छोटे बेटे को भी अच्छा काम मिल गया। परिवार में फिर से सुख-शांति लौट आई।
🌈 सुखमय अंत
समय बीतता गया। वही गरीब घर अब सम्मानित घर बन गया। गाँव में लोग बड़ी बहू से सीख लेने आने लगे।
बड़ी बहू हमेशा यही कहती—“धन से बड़ा धैर्य होता है, और ईश्वर की भक्ति से बड़ा कोई सहारा नहीं।”
🌺 कहानी से शिक्षा
👉 बृहस्पतिवार का व्रत सच्चे मन और अच्छे कर्मों से फल देता है।👉 अहंकार और दिखावा जीवन को नष्ट कर देता है।👉 धैर्य, श्रद्धा और सेवा से भगवान बृहस्पति अवश्य प्रसन्न होते हैं।

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