राजा, गाँव का रामू और किस्मत की सबसे बड़ी परीक्षा
(एक अद्भुत, जादुई और प्रेरणादायक हिंदी परी-कथा)
बहुत पुराने समय की बात है। दूर-दूर तक फैले मैदानों, लहलहाते खेतों और ऊँचे-ऊँचे किलों से घिरा हुआ एक विशाल राज्य था — सुवर्णपुर। यह राज्य धन-धान्य से भरपूर था, लेकिन इसके बावजूद यहाँ के गरीब लोग अक्सर भूखे रहते थे। वजह थी — राज्य का कठोर और अहंकारी राजा विक्रमसेन।
राजा विक्रमसेन को अपनी शक्ति, सेना और सोने पर बहुत घमंड था। वह मानता था कि किस्मत सिर्फ़ राजाओं के लिए होती है, और गरीब लोग अपने भाग्य के स्वयं जिम्मेदार होते हैं। उसे गरीबों की पीड़ा, आँसू और संघर्ष से कोई फर्क नहीं पड़ता था।
🌾 गाँव का साधारण लड़का – रामू
इसी राज्य के एक कोने में बसा था एक छोटा-सा गाँव — धर्मपुर।इस गाँव में रहता था रामू, एक साधारण किसान का बेटा।
रामू के पिता का देहांत बहुत पहले हो चुका था। वह अपनी बूढ़ी माँ के साथ कच्चे घर में रहता था।दिन निकलते ही रामू खेतों में काम करने चला जाता,और रात को माँ के पैरों में तेल लगाकर सुला देता।
उसके पास न सोना था, न ज़मीन, न कोई पहचान।लेकिन उसके पास था —सच्चाई, मेहनत और दूसरों के लिए दर्द महसूस करने वाला दिल।
🌙 पहली परीक्षा – भूखा साधु
एक रात रामू खेत से लौट रहा था। रास्ते में उसे एक बूढ़ा साधु दिखा, जो पेड़ के नीचे बैठा काँप रहा था।उसके पास न कपड़े थे, न भोजन।
साधु ने कमजोर आवाज़ में कहा —“बेटा… मुझे बहुत भूख लगी है।”
रामू के पास सिर्फ़ एक ही रोटी थी —जो उसकी माँ ने उसके लिए बनाई थी।
रामू ने बिना सोचे वह रोटी साधु को दे दी।
साधु की आँखों में चमक आ गई।उन्होंने कहा —“वत्स, आज तुमने किस्मत की पहली सीढ़ी चढ़ ली है।”
इतना कहकर साधु अचानक हवा में विलीन हो गए।
रामू हैरान रह गया।
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🪄 जादुई कड़ा
अगली सुबह रामू खेत जोत रहा था, तभी मिट्टी से एक पुराना तांबे का कड़ा निकला।जैसे ही उसने कड़ा पहना, उसके कानों में एक धीमी आवाज़ गूँजी —
“जब तू बिना स्वार्थ किसी की मदद करेगा,तेरी किस्मत तेरे साथ चलेगी।”
रामू डर गया, लेकिन उसने कड़ा उतारा नहीं।
👑 राजा की बड़ी घोषणा
उसी समय राज्य में एक भयानक संकट आ गया।कई महीनों से बारिश नहीं हुई थी।नदियाँ सूख रही थीं, खेत बंजर हो रहे थे।
राजा विक्रमसेन ने दरबार में घोषणा की —
“जो भी इस सूखे का समाधान बताएगा,उसे आधा राज्य और राजकुमारी से विवाह मिलेगा।”
बड़े-बड़े विद्वान आए, तांत्रिक आए, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।
🌧️ रामू की हिम्मत
गाँव में लोग कहने लगे —“अगर बारिश नहीं हुई, तो हम सब मर जाएँगे।”
रामू का दिल काँप उठा।उसने सोचा —“अगर मैं कुछ कर सकता हूँ, तो मुझे कोशिश करनी चाहिए।”
सबने उसे रोका —“राजा हँस देगा, अपमान करेगा।”
लेकिन रामू राजधानी चला गया।
दरबार में जैसे ही एक गरीब लड़का सामने आया, सब हँस पड़े।
राजा ने व्यंग्य से कहा —“अगर तीन दिन में बारिश करवा दे, तो इनाम तेरा।”
🌲 जंगल की रात और अंतिम परीक्षा
हताश रामू जंगल में चला गया।वहीं वही साधु प्रकट हुए —अब वे अपने असली रूप में थे — इंद्रदेव ⚡
इंद्रदेव बोले —“बारिश माँगने से नहीं आती, रामू।बारिश त्याग और सच्चे बलिदान से आती है।”
रामू ने बिना देर किए वह जादुई कड़ा नदी में बहा दिया —जो उसकी किस्मत का सहारा था।
🌈 चमत्कार
आकाश में बादल गरजे।बिजली चमकी।मूसलाधार बारिश शुरू हो गई 🌧️🌧️🌧️
पूरा राज्य खुश हो गया।
रामू बेहोश होकर गिर पड़ा।
👑 राजा का परिवर्तन
राजा विक्रमसेन ने सब अपनी आँखों से देखा।उसका घमंड टूट गया।
उसने रामू से कहा —“आज तुमने मुझे सिखाया किकिस्मत ताज नहीं, दिल देखती है।”
रामू ने आधा राज्य लेने से मना कर दिया।
उसने कहा —“मुझे बस इतना चाहिए कि कोई भूखा न सोए।”
🌸 सच्चा अंत
रामू गाँव लौट गया।राजा ने पूरे राज्य में नियम बनाया —कोई भूखा नहीं सोएगा।
और रामू बन गया —किस्मत बदलने वाला इंसान।
✨ कहानी की सीख
सच्चा दिल सबसे बड़ा जादू है
बलिदान से ही भाग्य बदलता है
इंसान छोटा हो सकता है, उसकी नियति नहीं

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