लालची दूधवाला और सच्चाई का जाल
“ट्रिन… ट्रिन…”
साइकिल पर दूध के दो बड़े कैन लटक रहे थे।और उस साइकिल को फर्राटे से चला रहा था — मनोहर दूधवाला।
“आ जाओ काकी, ताज़ा दूध ले लो…”वह हर रोज़ की तरह आवाज़ लगा रहा था।
गांव के लोग उसे बड़ा मेहनती और ईमानदार मानते थे।समय पर आता था।कम दाम में दूध देता था।और चेहरे पर हमेशा मासूमियत का मुखौटा लगाए रहता था।
लेकिन हर कहानी में जो दिखता है, वह सच नहीं होता।
गांव का भरोसेमंद दूधवाला
सुनीता काकी आंगन से बाहर आईं।
“अरे मनोहर बेटा, आज आधा लीटर ज्यादा देना। बिटिया को खीर खानी है।”
“क्यों नहीं काकी… आपकी बिटिया है, मेरी भी बिटिया जैसी है।”
मनोहर ने मुस्कुराते हुए दूध नापा।
काकी खुश हो गईं।
“भगवान तेरा भला करे बेटा… इतना सस्ता और बढ़िया दूध कोई नहीं देता।”
मनोहर सिर झुकाकर बोला —“आप लोगों का आशीर्वाद है।”
गांव में हर घर में उसकी यही छवि थी।ईमानदार।गरीब।मेहनती।
सच्चाई तबेले में छिपी थी
दूध बांटकर मनोहर घर लौटा।
पत्नी राधा दरवाजे पर खड़ी थी।
“आज देर हो गई?”
“अरे रास्ते में साइकिल पंचर हो गई थी।”
वह अंदर गया।सीधे तबेले में।
ताज़ा दूध के बड़े ड्रम रखे थे।
राधा ने पूछा —“ये क्या कर रहे हो?”
मनोहर ने जेब से एक सफेद पाउडर निकाला।
“चुपचाप देखती रहो। सवाल मत पूछो।”
उसने दूध में पाउडर मिलाना शुरू कर दिया।
राधा घबरा गई।“ये क्या है?”
“बस… ऐसा समझ लो कि मुनाफा बढ़ाने की दवा है।”
असल में वह पाउडर साधारण नहीं था।वह मिलावट का जादू था।
दूध गाढ़ा दिखे।स्वाद अलग लगे।लोगों को आदत पड़ जाए।
लालच की शुरुआत
शुरू में मनोहर सिर्फ पानी मिलाता था।
फिर अरारोट।फिर नकली क्रीम।
और अब… नया पाउडर।
वह खुद से बोला —“जब लोग भरोसा करते हैं, तभी फायदा उठाया जाता है।”
राधा चुप रही।
उसे डर था।लेकिन लालच का खेल वह रोक नहीं सकी।
अजनबी मेहमान
एक दिन गांव में एक नई खबर फैली।
सुनीता काकी का भतीजा शहर से आया है।
नाम था — अर्जुन।
शांत स्वभाव।तेज नजरें।और हर चीज़ को गौर से देखने की आदत।
मनोहर दूध देने गया तो दरवाज़े पर अर्जुन खड़ा मिला।
“आप नए हो गांव में?” मनोहर ने पूछा।
“हाँ, कुछ दिन रुकूंगा,” अर्जुन मुस्कुराया।
मनोहर ने दूध दिया।अर्जुन ने ध्यान से सूंघा।
एक पल को उसकी भौंहें सिकुड़ीं।
लेकिन वह चुप रहा।
शक की पहली चिंगारी
उस शाम अर्जुन ने काकी से पूछा —“आपको दूध का स्वाद पहले जैसा लगता है?”
काकी बोलीं —“अरे बेटा, अब तो और अच्छा लगने लगा है।”
अर्जुन ने मन में सोचा —“अच्छा या आदत?”
उसे कुछ गड़बड़ महसूस हुई।
रहस्यमयी सौदा
उधर मनोहर की मुलाकात दो अजनबी लोगों से हुई।
वे गांव के बाहर खड़े थे।
“दूध में पाउडर डालते हो?”एक ने सीधा सवाल किया।
मनोहर चौंक गया।
“क-क्या मतलब?”
“डरो मत… हम तुम्हारा भला चाहते हैं।”
उन्होंने उसे एक नई पुड़िया दी।
“ये मिलाओगे तो दूध की मांग दोगुनी हो जाएगी।”
मनोहर पहले डरा।
फिर लालच जीत गया।
“कितने की है?”
“एक हजार।”
मनोहर ने तुरंत पैसे दे दिए।
जहर की मिलावट
इस बार पाउडर अलग था।
वह सिर्फ गाढ़ापन नहीं देता था।
वह हल्का नशा पैदा करता था।
लोग दूध पीकर ताजगी महसूस करते।असल में वह नशे का असर था।
धीरे-धीरे गांव वालों को उसी दूध की आदत हो गई।
अर्जुन की योजना
अर्जुन ने एक दिन जानबूझकर मनोहर के घर जाकर दूध मांगा।
मनोहर घबरा गया।
“आज दूध खत्म हो गया।”
अर्जुन ने मुस्कुराकर कहा —“कोई बात नहीं।”
उसने चाय पी।
ध्यान से स्वाद पहचाना।
चाय शुद्ध थी।मतलब घर में असली दूध अलग है।
अब शक पक्का हो गया।
सच का जाल
अर्जुन असल में पुलिस अधिकारी था।
वह छुट्टी पर नहीं… जांच पर आया था।
शहर में नकली दूध का मामला चल रहा था।सप्लाई गांवों से जुड़ी थी।
उसे सुराग इसी गांव से मिला था।
गलती जो भारी पड़ी
एक दिन राधा ने गलती से ज्यादा पुड़िया डाल दी।
मनोहर को पता नहीं चला।
उस दिन कई लोग दूध पीकर चक्कर खाने लगे।
सुनीता काकी भी बीमार पड़ गईं।
अर्जुन ने तुरंत दूध का सैंपल लिया।
जांच में सब सामने आ गया।
पर्दाफाश
अगली सुबह गांव में पुलिस की जीप आई।
अर्जुन ने मनोहर को सबके सामने पकड़ा।
“दूध में नशा मिलाते हो?”
मनोहर कांप गया।
“नहीं… मैं निर्दोष हूं…”
लेकिन तबेले से पुड़िया बरामद हुई।
ड्रम में मिलावटी दूध मिला।
साथियों के नाम भी सामने आए।
गांव की आंखें खुलीं
जो लोग उसे ईमानदार समझते थे,आज वही लोग गुस्से में थे।
“हमने तुम पर भरोसा किया था!”काकी रो पड़ीं।
मनोहर सिर झुका कर खड़ा रहा।
उसका लालच आज उसे जेल की सलाखों तक ले गया।
सीख
लालच कभी तृप्त नहीं होता।
पहले थोड़ा।फिर ज्यादा।फिर सब कुछ।
मनोहर के पास कमाई थी।सम्मान था।भरोसा था।
लेकिन उसने शॉर्टकट चुना।
और शॉर्टकट हमेशा खाई में ले जाता है।
अंतिम दृश्य
जब पुलिस जीप उसे ले जा रही थी,वह पीछे मुड़कर अपने घर को देख रहा था।
राधा रो रही थी।
गांव के बच्चे फुसफुसा रहे थे —“यही है वो मिलावटी दूध वाला…”
उस दिन गांव ने सीखा —सच्चाई देर से सही,लेकिन सामने जरूर आती है।
✨ कहानी की सीख
भरोसा सबसे बड़ी पूंजी है।
लालच इंसान को अंधा बना देता है।
गलत रास्ता चाहे कितना भी आसान लगे, अंत बुरा ही होता है।
सच्चाई की जीत तय है।

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